बेला के फूल

बेला के फूल

किसी सलोनी भोर

 

मेरी मेज़ पे

कोई रख गया था

आकर देखा :

सिर्फ़ चन्द फूल थे

मोती–सी आब

मह–मह गमक

बेला–फूलों ने

सहसा लुभा लिया

प्यार से सूँघा

हाथ में ले सराहा

क्षण भर में

शैशव लौट आया

मेरे घर थे

बेला के कई झाड़

भोर होते ही

सबसे पहले मैं

पहुँच जाती

उन सबके पास

ढेर के ढेर

खिले पड़े होते थे

बेला के फूल

गोरे गदबदे वे

मोह लेते थे

जीवन बीत गया

वैसी सुगंध

और वैसी ताज़गी

फिर न मिली

अनुपम थे फूल

अनोखा काल–खण्ड 

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