बढ चल

बढ   चल तू बढ चल

ठहर न तू रूक न तू

बढ   चल तू बढ चल

चल ऐसे तू शेर हो

समुद्र की लहर हो

आधी  हो तूफान हो

पानी की बौछर हो

बढ   चल तू बढ चल

बढ   चल तू बढ चल॥

खा कसम ना रूकेगा तू

प्रक्रति का रुप तू

निरन्तर तू बढ चल

गर्जना तू कर चल

बढ   चल तू बढ चल।

 सन्सार सा विशाल तू

जल की तू धार है

नीले आसमान सा साफ तू

बढ   चल तू बढ चल।

द्वेष का विनाश कर

शत्रुओ  का नाश कर

आग सा है तेज तू

ललकार तू कर चल

बढ   चल तू बढ चल।

देश क सपूत तू

भविष्य का नेता है तू

देश का रक्षक है तू

विजय का आगाज कर

बढ   चल तू बढ चल

बढ   चल तू बढ चल॥

 

Leave a Reply