पावस बहुरंगी

पहली वर्षा

बूँदों की चित्रकारी

धूलि के रंग

छिप कर बैठी है

नीली चिड़िया

फूलों के झुरमुट

ताल पै फैले

घने जल-कुंतल

तैरती मीन

सखियाँ लिये साथ

घास चुप है

फुदक के हिलाता

हरित टिड्डा

नन्हीं बीर-बहूटी

‘शनील बूँद’

बारिश संग गिरी

आकाश-छत

छेदों भरी छतरी

टपक रही

फाख़्ता टेरती घूँ-घूँ

बोल रही है

निर्जन दोपहरी

सावन-धूप

दोपहरिया-फूल

चटख़ लाल

पूरब की खिड़की

उषा पहने

गोटा लगी ओढ़नी

घिरीं घटाएँ

छत पर मोरनी

टहल रही

भादों जो आया

जल-बालिका खेल

ने जी डराया

भर गए हैं ताल

निखरा रूप

पुरइन के पात

शोख़ अनूप

शैशव की क्रीड़ाएँ

फिर  शुरू हैं

तैरीं कागज़-कश्ती

 

वर्षा विनोदीः

कहीं पुए-पकौड़ी

कहीं है भूख

न छदाम न कौड़ी

पावस बहुरंगी

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