जमीन के अमीन

घर-घर ढूढों व जंजीरे व तक्दीरें

आज आई है इन्तहा की घडीं
जागो ओर देखो अपना गांव अपना देश
जो बना है आज एक शोला
आज पीट दो व थाप व ढिढोंरा
मरहम तो नही भगवन है साथी
मिट भी जाय आज अगर गम ना करना साथी
व सुहागन बनेगी घरती आज
अर्जुन प्रतिज्ञा कर लो चक्रव्यूह तोडेंगे आज
आज ढूढ लो उन फांलादू को
जो बने है वीर इन दर्रो दर्रो पर
दूरी तय कर लो आज तुम साथी
बच्चें बूढें की लाज रख लो आज तुम साथी
गाओ आज वीर राग व धुन
बढते जाओ बढते जाओ रुकेंगे नही आज हम
गिर कर भी तुम उठ जाओगे
अपने ही हाथों से वीरता का परचम लहराओगें
दूर दर किनारा कर दिया आज हमने साथी
जो बनकर आये थे अपने देश मे हाजी
दिया उनको सत्स अहिंसा का पाठ
दूर से नजर आया घनघोर उनको आज
सर पर पाल नही भीगे भागे चोपाल से
बोले सात समुद्र पार से
सत्य अहिंसा की जय हो
हम मिलकर बोले भारत माता की जय हो
देश मे मिटने वाले वीर जवानो की जय हो
सत्य अहिंसा की जय हो
भारत माता की जय हो

 

One Response

  1. ganesh dutt ganesh dutt 24/01/2013

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