मां\Maa

बच्चे का पहला शब्द है, मां
एक वर्ण से पूर्ण; शब्द है, मां
जीवन मे सबसे प्यारी,
बच्चे की पहली गुरू है,मां !

जब-जब बच्चा रोता है
तब-तब तड्पती है,मां

खुद गीले में सोकर

सुखे में सुलाये;वो है मां !

 

पहला कदम रखे स्कूल में

तब-भी याद आती है मां

गुरू जी जब भी धमकाये

तब-भी याद आती है,मां !

 

जो बच्चों से नराज ना हो

जो बच्चों से दूर ना हो

जिसकी डांट मे हो प्यार

वो स्वजन होती है, मां !

 

सबसे पहले सहारा बनती

हर-एक को चलना सिखाती

जिसके बिना हर-एक अधूरा

उस पूर्णता का नाम है मां !

 

बच्चे का स्वरूप है,मां

जीवन का दूलार है,मां

जीवन की गुप्त मंत्रणा

वात्सल्य का भाव है,मां !

 

आतप से बचाये सबको

गम की बरसात से दूर रखे

उलहानों को जो रोके,

वो आडी दीवार है,मां !

 

प्रेम का सागर है मां

नेत्रों का सुख है,मां

देवीयों में श्रेष्ट है मां

चारों दिशाओं का ज्ञान है,मां !

 

गीता का सार है, मां

कुरान का प्राण है मां

जीवन की उज्ज्वल ज्योति

स्वर्ग की देवी है मां !

 

सब तीर्थों मे सर्वोपरि

मन्दिर-मस्जिद से, पहले मां

अन्तर-चित्त को शक्ति देती

उस शक्ति का नाम है,मां !

 

चौदह-रत्नों में से; एक रत्न

पुण्य कर्मों का फल है मां

जीवन का नीचोड है मां

सत्कर्मों का सत्मार्ग है, मां !

 

तम को हर रोसन कर दे

उस तम-हर की आभा है मां

लेखनी कहती, क्या मैं लिखू

सर्वशक्तिमान है,मां !!

                                                राजमोहन  शर्मा

2 Comments

  1. Anil kumar sankrot 31/12/2012
  2. P.n. sankrot 31/12/2012

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