कुछ शेरो शायरी :

कुछ शेरो शायरी :
(81)
टुटा दिल
कभी किसी का दिल
दियो ना अकारण दुखाय ,
मन टूटे एक बार,
लाख यत्न करे जुड़ न पाय,
सजन मुरारका
(82)
दिल ने लिखा
समुन्दर की रेत पर लिखा,
लहरें आई और धो गई;
रेत का दोष इसमे कैसे,
दिल ने ग़लत जगह लिख था।
सजन मुरारका
(83)
मिलन
मिलके,ज़ुदा हो गये खुदसे,
हुस्नसे नहीं,तुमसे था प्यार;
दिल ने कहा वेवफा दिल से
अभी तो बाकी है दीदार !
सजन मुरारका
(84)
दिल की कहानी
प्यारके हर पल मे,
उनकी कहानी लिखी थी;
दिल के कागज़ पर,
पुरी ज़िन्दगानी लिखी थी,
सजन मुरारका
(85)
साथ बीते पल
वह लम्हा खोना नहीं चाहते
जब तुम्हारा साथ था ;
यह लम्हा जीना नहीं चाहते
जब तुम्हारा साथ छुटा !
सजन मुरारका
(86)
नज़र
नज़र मिले,नज़रें बचाकर,
नज़रें चुराकर करे इशारा,
नज़रें उठाये,नज़रें गिराये,
नज़रोंसे प्यार क खेल सारा;
सजन मुरारका
(87)
नजदीकीयां !
नजदीकीयां दिल कि,
दिल का हिस्सा बनी|
दिल से चाहे हटाना,
दिल को होगा मिटाना|
सजन मुरारका
(88)
तस्वीर
आईना तोड़े भी तो, ज़रे-ज़रे मे उनकी तस्वीर का दीदार है;
ख़ुश्बू उनकी सासों मे बस गई,फूलों से अब क्या सरोकार है,
सजन मुरारका
(89)
ख़िलाफ़त
मायुसी के गम मे,दिमाग़ जब भी उनके ख़िलाफ़ जाता;
दिल बड़ा बेईमान,ज़ेहन ने पुरज़ोर उनकी ही की हिमायत.
सजन मुरारक
(90)
हिमाक़त
यह जज़्बात मेरे दिल मे सदा रहते,प्यार मुझे उनसे था ;
उनकी बेरुखी से ही मैंने शायरी करने की हिमाक़त की है .
सजन मुरारका

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