कुछ शेरो शायरी :

कुछ शेरो शायरी :

(71)
सादगी
मासूमियत की सादगी से, वह जहेन में फरेब का नश्तर चलाती ,
मुहब्बत की सर्द चट्टानों को पिघला कर आग का समंदर बनाती ;
सजन मुरारका
(72)
वक़त
कहते जो हमारे लिये उनके पास वक़्त नहीं है ;
खोजेंगे हमे,वक़त आने पर,यह हमारा वादा है !
सजन मुरारका
(73)
आरजू
किसी के दिल में पनाह पाये,यह हमारी आरजू है ;
किसी के होंटों की मुस्कुराहट बने यह अरमान है ;
सजन मुरारका
(74)
गजरा
गजरा सजाया आपने मगर;
खुशबू फ़ैली देर तक,
हर दिल मे जंवा सा असर ,
चाहत जवां होती रही दुर तक ।
सजन मुरारका
(75)
इंतज़ार
दिन गुज़ारते उम्मीद से ,रातें गुज़रेगी ख्यालों मे,
रातें नहीं गुजरती ख्यालों से,इंतज़ार के लम्हों मे|
सजन मुरारका
(76)
ज़ख्म
खंज़र से लगा ज़ख्म फिर भी भर जाता;
ज़ुबां से लगा ज़ख़्म कभी भर नहीं पाता|
सजन मुरारका
(77)
चाहत
बड़ी मुद्द्त से चाह थी कोई दिलरुबा मिले;
मिले भी तो सनम,बड़े ही वह बेवफा मिले !
सजन मुरारका
(78)
आसूं
आसूं की बात क्या, ग़म मे ही तो बहते,
ख़ुशी के लम्हों मे भी आंसू निकल आते।
सजन मुरारका
(79)
जज़्बात
मेरे जज़्बात की कद्र कंहा,
हर रोज़ यों ही दम तोड़ते;
परवाह भला उन्हें क्यों,
वह तो मोहब्बत का कारोबार करते।
सजन मुरारका
(80)
मोहब्बत
मोहब्बतकी आयतों को सनम,
ख़ुदा-ऐ पाक का दर्ज़ा दिया |
फिर भी नजरें न हुई इनायत,
हमने ग़म से दामन जोड़ लिया,
सजन मुरारका

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