कुछ शेरो शायरी :

कुछ शेरो शायरी :
(61)
हाल परवाने सा
हाल परवाने सा, शंमा रोशन हुई,
खींचे चले आते,पता अन्जाम मिलन का :
हम तो जीते जी मर गये हैं मजबूर-नाकारा
सांसे चलती आपके साहरे, !!
सजन मुरारका
(62)
भेंट
भेंट क्या करें तुम को फूलों का गुलिस्ता या खिलते गुलाब की कली
तोहींन हमारी,खुद गुलिस्ता या खुद गुलाब है जो,वही उन्हें देने की…
सजन मुरारका
(63)
तन्हाई की रात
अकेला सा महसूस करता तन्हाई रातों मे,
याद तुम्हे कर लेता हूँ;
हर लम्हा खुद-ब-खुद आबाद होता,
हुजूम निकलता लाखों चाँद-सितारों का|
सजन मुरारका
(64)
परछाई
फुर्सत नहीं,जरुरत नहीं, न इमान भी,
किसी और को पाने की ;
तुम रहते हो हरवक्त साथ,
देख लेते हैं तुम्हे अपनी परछाई मे,
सजन मुरारका
(65)
दर्द
बंद कर लेते अपने होंट,
मगर दिल से दर्द है निकला ;
खुदा का शुक्र है !
अभी तल्लक मेरा जनाजा न निकला |
सजन मुरारका
(66)
हुश्न
पर्दा-नशीं थे नहीं वह,
हुश्न की चर्चा सरे बाजार होती है ;
सरेआम महफील मे,
उनका जलवा कत्ले-आम मचाता है !
सजन मुरारका
(67)
मासूमियत
मासूमियत की सादगी से, वह जहेन में,
फरेब का नश्तर चलाती ,
मुहब्बत की सर्द चट्टानों को पिघला कर.
आग का समंदर बनाती ;
सजन मुरारका
(68)
यादे
कितने अर्स काबीज रखेगी वह जिद्द,
खुद के बेकाबू दिल की धढ़कन पे ,
हमारी भी जिद्द है, मरते दम तक,
यों ही धढ़के- यादे बन उन के दिल मे |
सजन मुरारका
(69)
दीदार
कत्तल भी हो जायें, रजो-गम नहीं, दीदार तो होता है ,
अफ़सोस किसी भी दौर का नहीं,यादें दीदार की महफूज है ;
सजन मुरारका
(70)
शोख़ी
मेरे दिलवर की शोख़ी,खिलती कलियों की नक्श- पहचान है,
रहम-ऐ-अदब का तकाजा, उनकी सादगी कलियों को बख्शा है ;
सजन मुरारका

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