कुछ शेरो शायरी

कुछ शेरो शायरी:-
(51)
साथ
मरना देखोगी, छुटा जो तुम्हारा हाथ;
तुमने मेरा जीना देखा, देकर मेरा साथ!
सजन मुरारका
(52)
जीने का सहारा
तब रात की तन्हाई में याद करता था!
अब रात की तन्हाई में याद करते हैं,
तब तेरी यादें मेरे जीने का सहारा था!
अब तेरी यादें मेरे जीने का सहारा हैं,
सजन मुरारका
(53)
नज्म
प्यार की नज्म मगर जाने-
क्यूँ लाख कोशिश से भी न लिख पाते हैं ?
लगता है फुल पे मंडराती तितली
पकड़ते-पकड़ते उंगली से छुट जाती है!!
सजन मुरारका
(54)
आईना
आईने जैसी नजाकत है हमारी भी सनम,
ठेस हलकी सी लगे तो देर नहीं चटकने में !
सजन मुरारका
(55)
ख्वाब
सोचते हैं, ख्वाब में भी दूर रहेंगे तुम से !
पर नींद नहीं आती बिन तुम्हारे ख्वाब के ,
सजन मुरारका
(56)
गम के आंसू
गम के आंसू पी-पीकर, गम ही हम से पनाह मांगें जालिम !
हमारी दास्ताँ सुन, मयखाने मे प्यालों पर प्याले भरें जाते हैं…!
सजन मुरारका
(57)
शिकवा
यकीनन जीने को जी लेते,महफूज अगर रहें उनके इरादे,
नफरत मे भी डर है,शिकवा करेंगे, हम तब्बजो नहीं देते !!
सजन मुरारका
(58)
” चाँद ”
“उनके ” हुश्न से उस चाँद को मिलाना ही गैरवाजिब था,
मेरे ” चाँद ” से बाहर आसमां का खुद ही शरमा गया !
सजन मुरारका
(59)
कातिल
कातिलाना मुस्कान अधरों मे,हंसी,उनके चहरे पर ,
देख हाल हमारा,” खुशी”छुपती नहीं,जल्लादी शान ;
सजन मुरारका
(60)
दीवाना
पंखुढ़ियों मे फँस, अदाओं से बेहाल,हो कर परेशान;
दीवाना बन,काँटों के जखम लिये, अश्क भीगे नयन;
सजन मुरारका

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