कुछ शेरो शायरी :

(41)
औकात
किसी के दर्द को बांटना हो तो,दिल मे उतर कर देखो,
भर के बांहों मे,उसकी आँखों मे खुद की औकात देखो|
सजन मुरारका
(42)
“दर्द”का रिश्ता
तुम्हारी आँखें समझती थीं “दर्द”,
मेरा भी एक रिश्ता ऐसा !
तुम्हारी नफ़रत का दर्द,”
दर्द” से मेरा रिश्ता भी एक ऐसा !
सजन मुरारका
(43)
मोहब्बत का पैमाना
मोहब्बत को रब जाना , प्रेम-प्यार को इबादत माना ;
मुस्कराहट पर मर मिटते,हर लहज़ा था मीठा-सुहाना !
सजन मुरारका
(44)
ज़लवा
हुश्न के ज़लवे पर इतना न तुम इतराव !
चमक दो दिन की,वक़्त रहते संभल जाव|
सजन मुरारका
(45)
प्यार का मंज़र!
अफ़साना यह रहता है,हर तरफ़ प्यार का मंज़र दिखा ;
फूलों से लदी हर शाख मे, मोहब्बत का वास्ता दिखा !
सजन मुरारका
(46)
जीने का बहाना
प्यार अगर मिलता तो,जीयें मशगुल होकर.
दर्द मिला, तभी जीते प्यार को याद कर |
सजन मुरारका
(47)
चाहत
मरना चाहे इस लिये,
उनके दिल से गिर गये ;
जिन्दा हूँ की हमें फिर से,
दिल मे ज़गह मिल जाये !
सजन मुरारका
(48)
तोउफा दर्द का!
दर्द को ना देखिये , उल्फत की नज़र से,
स्वीकारा इसको हमने तोउफा समझ आपसे;
सजन मुरारका
(49)
सादगी
सादगी की यह मूरत, फूलों सी मासूमियत का नकाब पहेने है ;
लरज़ता दिल, रंगीनियाँ छुपी सीने के अन्दर, दिलवर मेरा है !
सजन मुरारका
(50)
बेरुखी
खुद की बेरुखी पर,
वह अगर एक बूंद आंसू बहाते,
कसम खुदा की,
हम गम का सागर पी जाते।
सजन मुरारका

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