कुछ शेरो शायरी :

कुछ शेरो शायरी :
(11)
दिल की आवाज़
छोड़ चले गये हो पर दिल से गये नहीं ;
गौर से सुनने से दिल मे हरदम गुनगुनाते |
सजन मुरारका
(12)
शमा
तेरा प्यार शमा बनके मेरी दुनिया रोशन करता है,
ख़्वाब की मानिंद हर वक़्त मेरे दिमाग में रहता है.
सजन मुरारका
(13)
बहकना
लोग सही कहते,इस उम्र मे भी;
बहकते हम गजरे की महक से,
पूछेंगे उनसे जरा,पता तो चले भी,
उम्र का क्या तक़ाज़ा बहकने से ।
सजन मुरारका
(14)
सूरत
पत्थरों को तराश के बनती हसीन मूरत!
दिल को तराश कर सजाई थी तेरी सूरत ।
सजन मुरारका
(15)
एतराज़
मैं तेरे हुश्न के गरूर से नशा किया, एतराज़ न जाने तूने क्यों किया,
तुझ पर एतवार करके, ग़म का, ज़िन्दगी भर दिल पर ज़ख्म लिया,
सजन मुरारका
(16)
नशा
नशा छोडा,तुम छोड़ गई ,सोचते तुम लोटोगी,जो नशा लोटा दिया,
हम पीते नहीं जानम, वक़्त तुम्हारे इन्तज़ार का, यों ही हल्का किया |
सजन मुरारका
(17)
उलहाना
तेरी आँखों से नफ़रत का उलहाना,हर बाज़ी को डुबो दिया
शराब की थी नहीं इतनी औकात,तुम ने ही मदहोश कर दिया,
सजन मुरारका
(18)
तस्वीर
तस्वीर मिटाने से पहले, तस्वीर थामनी होगी ;
वेवफाई बताने से पहले,वफाई जताना है ज़रूरी।
सजन मुरारका
(19)
बिज़ली
बिज़ली सी कोंध जाती, अन्धेरी रात के सन्नाटे मे,
हुस्न का “ज़लवा”, ज्वालामुखी सा फ़ुटता मन मे !
सजन मुरारका
(20)
उमीद
उमीदों के बादल उड़ गये, हव़ा ने दिशा बदल दी ,
एक “ना” से उन्होंने पूरी कहानी ही बदल दी ;
सजन मुरारका

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