लेखनी मशाल है

निज रश्मियां पुनीत ले,

जो तिमिर को जीत ले.

पथ प्रशस्त जो करे,

वो लखनी मशाल है !!

 

जो तीक्ष्ण तीव्र दक्ष हो,

तटस्थ हो, निष्पक्ष हो,

जो बात न्याय की करे,

वो लेखनी मशाल है !!

 

जो सत्य का सिपाही हो,

रक्त जिसकी स्याही हो,

कटे मगर झुके नहीं,

वो लेखनी मशाल है !!

 

व्यर्थ, मन के भय निकाल दे,

लहू मे जो उबाल दे,

” समर ” का आह्वान जो,

वो लेखनी मशाल है !!

 

आईना हो समाज का,

साक्षी कल और आज का,

जो काल से कला करे,

वो लेखनी मशाल है !!

 

जो मिटाती भ्रान्तियां,

जो बुलाती क्रान्तियां,

कायाकल्प जो करे,

वो लेखनी मशाल है !!

 

आक्रान्त जिससे ताज हो,

जो “आम ” की आवाज हो,

निरीह का मशीह जो,

वो लेखनी मशाल है !!

 

लो लक्ष्य पर सटीक हो,

जो विजय प्रतीक हो,

सतत चलायमान जो,

वो लेखनी मशाल है !!

 

समर नाथ मिश्रा…  08928068501

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