पलकें

दृग पट प्रिय पिटारी पलकें,

पुलकित प्यारी प्यारी पलकें,

नयनकेश के तीर सजाये,

काम कमान तुम्हारी पलकें ..

 

भोर पहर अलसायी पलकें,

मन मोहिनी मदमायी पलकें,

होगा ना प्रात रविकिरणों से,

तुमने ना अगर उठायी पलकें ..

 

उठती, उठकर, झुक जाती पलकें,

लगती ललित लजाती पलकें,

पद्म पुष्प पंखुडियों जैसी,

” समर” ह्रिदय को भाती पलकें..

 

घन है या घटा हनेरी पलकें,

चंचल चपल चितेरी पलकें,

मुग्ध हृदय पर चित्र खिंचती,

इन्हे देखकर मेरी पलकें..

 

नींद से भारी, बोझिल पलकें,

सुन्दर स्वर्गिक स्वप्निल पलकें,

कितनी गुमसुम बातें करती,

इन नयनो से घुलमिल पलकें..

 

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