आज

यह एक हिन्दी ग़ज़ल है आशा करता हूँ संदेश पहुँचेगा

यही सपना देखता बच्चा बच्चा दिखा।
सद्दाम ही एक आदमी अच्छा दिखा।

आज वे किसी को चोट देकर हंसते हैं,
कोई हिटलर मुझे तन मे पनपता दिखा।

इन आँखो मे कभी हमने भविष्य देखा था,
वे ही आज उठते हैं तेलगी को निष्ठा दिखा।

है कोई साथ जो आवाज बुलंद करे,
सत्य के पक्ष मे भी कोई न सच्चा दीखा।

हथियार, ये बंदूक तो सब खिलौना हैं,
बसएक अमित ही यहाँ कच्चा दिखा।

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