कभी तो मायके जाओ ना बीवी

बेचारा पति क्या चाहता है अपनी बीवी से  जरा गौर फरमाए ः

कभी तो मायके जाओ ना बीवी, सुख का आभास कराओ ना बीवी

कभी तो मायके जाओ ना बीवी ……..

साथ रह-रह कर अब अक चुके है, बाते सुन-सुन कर अब थक चुके है

भर भी अब तो नाको तक चुके है, करेले के जैसे पक चुके है

खुशी का कुछ तो एह्सास कराओ ना बीवी

कभी तो मायके जाओ ना बीवी…….

मेरे चारो खम्बे तुने हिला दिये है, मुझे बैंगन तक तुने खिला दिये है

मेरे कौन से ताल मे सुर मिला दिये है, घिये और तोरी के जुस पिला दिये है

पिलाओ चाहे ना पिलाओ पर कुछ  तो अच्छा खिलाओ ना बीवी

कभी तो मायके जाओ ना बीवी …….

पार्टियों  मे जाने का दिल करता है, ठन्डे शावर मे नहाने का  दिल करता है,

के सिगरेट-विगरेट दो  पैग लगाने का दिल करता है,

पुरानी कोई गर्ल फ्रेन्ड से मिलने मिलाने का दिल करता है

कभी तो कुछ तरस खाओ ना बीवी

कभी तो मायके जाओ ना बीवी ……

मेरे सपने सारे सुला दिये है, मेरे अपने सारे भुला दिये है

पुराने यार सज्जन सब छुड़ा दिये है, कि रिश्ते-नाते सब तुड़ा दिये है,

मेरे ससुराल से भी रिश्ता मेरा तुडवाओ ना बीवी

कभी तो मायके जाओ ना बीवी, कभी तो मायके जाओ ना बीवी

अब बीवी क्या कहती चाहती है अपने मियां से जरा गौर फरमाए ः

कभी तो घर जल्दी आओ मियां, अब और ना मुझे सताओ मियां

कभी तो घर जल्दी आओ मियां ……

सास ससुर की सेवा कर-कर, जीती रही मै रोज मर-मर,

नन्दे और देवरों के ताने सुन-सुन, चुप रही मै हमेशा गुम-सुम

तुम तो ना यूँ  दिल दुखाओ मियां

कभी तो घर जल्दी आओ मियां ……

रोजाना दफ्तर से देर से आता है , पार्टियाँ करता है मौज उडाता है,

क्भी तो बता दे सोते जगते, रात को कौन से दफ्तर लगते,

झूठ बोल बोल यूँ तो ना रुलाओ  मियां

कभी तो घर जल्दी आओ मियां, कभी तो घर जल्दी आओ मियां

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गुरचरन मेह्ता

 

 

 

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