मौत की आहट

मौत की आहट। (गज़लनुमा गीत)

गीतकार-स्वरांकन-संगीत-गायक-मार्कंड दवे ।

संगीत-स्वरायोजन-प्रसुन चौधरी.

हर साँस मे मौत की आहट सुनाई देती है ।

ज़िंदगी अब तो गिन-गिन के बदला लेती है ।
१.
ज़िंदगी जीने मे जो माहिर माने जाते थे ।
उनको अब जीने की रीत देखो सिखाई जाती है ।
हर साँस मे ……………….
२.
बेआबरु न हो कोई, मैं तो ख़ामोश रहता था ।
कहानी मेरी ही अब मुझ को सुनाई जाती है ।
हर साँस मे ……………….

३.
मुआफ़ करना गुस्ताख़ी अगर हो कोई ।
आखरी ख़्वाहिश, सभी से तो पूछी जाती है ।
हर साँस मे ……………….

मार्कड दवे ।

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