उम्मीद के चरागों का उजाला नहीं जाता….

चलो माना के हमसे सम्भाला नहीं जाता ,
पर बोझ अपना दुसरे पे डाला नहीं जाता ,

रहेगी सांस तब तलक रहेगा इंतज़ार तेरा ,
उम्मीद के चरागों का उजाला नहीं जाता ,

बेगुनाहों को सज़ा देता है अमीर -ऐ- शहर ,
मुजरिम को मगर क़ैद में डाला नहीं जाता ,

परवरिश का अपने कुछ तो लिहाज़ कर ,
ज़ईफ़ वालिदैन घर से निकाला नहीं जाता ,

परिन्दे तो सभी पालते हैं शौक़ से मगर ,
इंसानियत क्यूँ किसी से पाला नहीं जाता ,

भरती हैं झोलियाँ सु -ऐ- तैबा में सभी की ,
उस दर से ख़ाली मांगने वाला नहीं जाता !!

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  1. aahuti 05/12/2012

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