कहानी नोजवां पीढ़ी की

कहानी नोजवां पीढ़ी की :-
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दिल में थे शोले था आँखों में पानी
हर एक नोजवां की यही थी कहानी
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क्या हिन्दू क्या मुस्लिम क्या सिख क्या ईसाई
आजादी की थी सबने रट एक सी लगाई
वतन परस्ती की खातिर फांसी पर चढ़ गए
सीखो कुछ उनसे क्या शहीदी थी पाई
गुम हो गयी थी जेलों में हाय उनकी जवानी
दिल में थे शोले था आँखों में पानी
हर एक नोजवां की यही थी कहानी I
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सड़ गए वे जेलों में इस देश के नाम पर
देशवासिओं के नाम पर आबादी के नाम पर
याद आती है मझे उस अशफाक उल्ला खान की
मिट गए जो भरी जवानी में आज़ादी के नाम पर
बीच भंवर से  निकालना देश को, बस यही थी जिंदगानी
दिल में थे शोले था आँखों में पानी
हर एक नोजवां की यही थी कहानी
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अगर हम आज की नोजवां पीढ़ी से तुलना करे तो ः
आज हर दिल में हैं नफरत के शोले, आखों में लालच का पानी
हर एक नोजवां की यही है कहानी
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मिट जाते थे वे तब भारतीयता के नाम पर
मिट जाते हैं अब हम जातीयता के नाम पर
मिट जाते थे वे तब इंसानियत के नाम पर
मिट रहे हैं अब हम हैवानियत के नाम पर
मिट जाते थे वे तब मान-सम्मान के नाम पर
मिट रहे हैं अब हम खुदा और भगवान के नाम पर
मिट जाते थे वे तब आशा के नाम पर
मिट रहे हैं अब हम भाषा के नाम पर
मिट जाते थे वे तब इस देश के नाम पर
मिट रहे है अब हम छोटे-छोटे प्रदेश के नाम पर
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जिस अखंडता को बचाने के लिए वे मिट गए
आज हम उसी के खंड-खंड कर रहे हैं
जिस संस्कृति को बचाने हेतु वे मिट गए
आज हम उसी के नाम पर आपस में लड़ रहे हैं
आज गौतम बुद्ध की धरती का रोम-रोम रो रहा है
और देश का नोजवां अंधकार की गहराई में जाने कहाँ सो रहा है
दिन ब दिन ऊँचे होते जा रहे हैं आज लाशों के अम्बार
मर जाने से अधिक हो गया है आज जी सकना दुशवार
साथियों हमें मिलकर इस बिगड़ती हुई स्थिति को संभालना है
और बीच भंवर में फंसी हुई इस नैया को मिलकर उबारना है
क्योंकि
आज लड़ रहे हैं हम आपस में, कल को लड़ेंगी नस्लें
जब न होगा अच्छा बीज तो सोचो कैसी होंगी फसलें
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इसलिए समझो इस बात को और न करो मनमानी
पल दो पल की मिली है यह ज़िन्दगी सुहानी
न जाओ उस राह पर जो राह है अन्जानी
आओ कर दे ये ज़िन्दगी देश के नाम
और कहलायें ज़रा हम भी बलिदानी
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ताकि आने वाली नस्ल यह  न कह सकें कि ः
हर दिल में थे नफरत के शोले, आँखों में लालच का पानी 
हर एक नोजवां की यही थी कहानी 
हर एक नोजवां की यही थी कहानी 
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गुरचरन मेह्ता 

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