तुम्हारी याद( हाइकु)

1

दूर नभ में

चुप तारा अकेला

खोजे मीत को ।

2

छाई उदासी

मन-मरुभूमि में

अँखियाँ प्यासी ।

3

बाट है सूनी

नहीं आया बटोही

व्यथा है दूनी ।

4

कुछ न सूझे

गुमसुम आँगन

भीगा है मन ।

5

नहीं कुसूर

हम हैं कोसों दूर

मन के पास ।

6

यादें पखेरू

डरें दुबके नीड़

चुगते चैन ।

7

भोर न भाई

जिस दिन भी तेरी

याद न आई ।

8

संझा -जीवन

बनी यादें तुम्हारी

मन्दिर बाती ।

9

कोकिल -पीर

चुभें यादों के तीर

बरसे नीर ।

10

तुम्हारी याद

अँधेरे में दीप -सी

रही आबाद  ।

11

आतप -मन

नीम की छाँव बनी ।

तेरी वो याद ।

12

नदी का तीर

सपनों  में आकर

देता है पीर ।

13

छूट गई वो

बौराई अमराई

छूटी लुनाई ।

14

नयन जल

सुधियों -भरा ताल

गया छलक ।

15

टेरती रही

हिलते रूमाल -सी

व्याकुल यादें ।

16

झुके नयन

मधुर कथा कहें

स्मित अधर ।

17

पुरानी बातें

भाई याद दिलाए

बहना भूले  ।

18

समेटा गया –

न सुधियों का जाल

सिहरा ताल ।

19

छोटी-सी चूक

अधूरा -सा जीवन

बाकी थी हूक ।

20

बीते बरसों

अभी तक मन में

खिली सरसों  ।

21

मन की मीन

सुधियों -सी घिरती

रही तिरती ।

22

व्याकुल मन

दो पल का मिलन

यही जीवन ।

23

पोंछो ये पलकें,

मोतियों भरे हैं  ये

सागर छलके ।

24

बेबस हुए

आँखें डबडबाई

याद जो आई ।

25

धुले रूप -सी

गुनगुनी धूप -सी

यादें तुम्हारी ।

26

पाखी मन के

जीवन -आँगन के

मिल न पाते ।

27

मिली न पाती

सिसके रात भर

 बिछुड़ा साथी ।

28

पता है खोया

कैसे भेजूँ संदेसा

मन था रोया ।

29

बँधती नहीं

कभी किसी पाश में

आवारा यादें ।

30

धोना पड़े जो

कभी मन-आँगन

यादें बचाना ।

31

यादें हैं दिया

दिल के अँधेरों में

उजाला करें ।

32

लौटते नहीं

बीते हुए  वे पल

खो गए कल ।

33

झील उफ़नी

जब बिसरी यादें

घिरीं बरसीं  ।

34

भीगी बाती-सी

करती उजियारा

यादें सुहानी ।

35

छुआ तो झरी

नाज़ुक पाँखुरी -सी

यादें पुरानी ।

36

मन -मरु को

तरबतर करें

पनीली यादें ।

37

तरस उठी

नदी बन उमड़ी

बिछुड़ी यादें ।

38

रहे आबाद

सातों जनम तक

तेरी ही याद ।

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