हाइकु

1

क्षय -पीड़ित

हुआ नील गगन

साँसें उखड़ीं ।

2

तन झुलसा

घायल सीने का भी

छेद बढ़ा है ।

3

कड़ुवा धुँआ

लीलता रात-दिन

मधुर साँसें ।

4

सुरभि रोए

प्राण लूट रहीं

विषैली गैसें ।

-0-

5

वसुधा -तन

रोम- रोम उतरा

विष हत्यारा ।

6

सुगन्ध छुपी,

पहली वर्षा में जो

दुर्गन्ध उड़ी ।

 

7

दुर्गन्ध बने

घातक रसायन

माटी  मिलके ।

8

गुलाब दुखी

बिछुड़ी है खुशबू

माटी हो गया ।

9

घास  जो जली

धरा गोद में पली

गौरैया रोए ।

-0-

10

भीड़ में मृगी

लुब्धक सब घेरे

राह खोजती ।

11

बैठे पहरे

घर और बाहर

जाए किधर

12

प्राण खिलते

दो पल जो मिलते

होते अपने ।

13

कँटीली बाड़

घायल हुए पाँव

आगे पहाड़ ।

14

जीवन मूल-

माँगने पर फूल

मिलते शूल ।

15

सम्बन्ध -भार-

लादकर  नोकाएँ

होती न पार ।

16

कण्ठ था रूँधा

उनको पुकारा था

सुन न पाए ।

17

गीत गाए थे

भाव-भरे तुमने

गुन न पाए ।

-0-

 

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