तेरा था कुछ और न मेरा था

तेरा था कुछ और न मेरा था
दुनिया का बाज़ार लगा था

मेरे घर में आग लगी जब
तेरा घर भी साथ जला था

अपना हो या हो वो पराया
सबके दिल में चोर छिपा था

तुम भी सोचो मै भी सोचूँ
क्यों अपनों में शोर मचा था

टोपी – पगड़ी बाँट रहे थे
खूँ का सब में दाग लगा था

मै भी तेरे पास नहीं था
तू भी मुझसे दूर खड़ा था

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