सबूत

र रहा हूं इकट्ठा

वो सारे सबूत

वो सारे आंकडे

जो सरासर झूटे  हैं

और बे-बुनियाद हैं

जिसे बडी खूबसूरती से

तुमने सच का जामा पहनाया है

कितना बडा छलावा है

मेरे भोलेभाले मासूम जन

आसानी जाते हैं झांसे में

 

जादूगरों

हाथ की सफाई के माहिर लोगों

तुम्हारा तिलस्म है ऎसा

कि सम्मोहित से लोग

कर लेते यकीन

अपने मौजूदा हालात के लिए

खुद को मान लेते कुसूरवार

खुद को भाग्यहीन……

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