प्रकृति गान

नवप्रभात की सुंदर छटा मे,  विहंगो का कर्णमधुर कलरव.. अलंकृत कर मधुर सुरों को, बनाता नवीन गीत भैरव….    दिवाकर की नव आशा प्रदत्त, धूप का वह विस्तृत बिखराव. इंगित अपने आगमन को कर, मानस मे फैलाता जैसे छाव…. अनेक रंगो से सजा नीलगगन, हरित वृक्षो को संरक्षण देता. सर्वव्याप्त नैसर्गिक सौन्दर्य  द्वारा, प्रकृति को जैसे आरक्षण देता….  विधाता प्रदत्त इस अनमोल, प्रकृति का करे सदा सम्मान, आओ सब मिलकर लिखे, एक नवीन प्रकृति गान….

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