कबिता

तुम पास नो हो मेरे मेरी जान निकलती है
तेरा साथ रहे जब तक मेरी सांसें चलती है

दुनियां में कहते हैं , कोई संग आता है न जाता
दिलबर तुमसे है मेरा जन्मों जन्मों का नाता

सपनों में न भुलाना मेरी जन्नत है तुम्ही से
मेरे हमसफ़र मेरे दिलबर मेरा सब कुछ है तुम्ही से

नजरें मिली जो तुमसे तो बात बन गयी है
तेरे प्यार को ही पाकर दुनियां बदल गयी है

तुम दूर क्यों रहती हो क्यों पास नहीं आती
जो दिल में यादें हैं बह दिल से नहीं जाती

दिल तुमने ले लिया है अब पास मेरे आओ
देखे न तुमको कोई आँखों में तुम समाओ

काब्य प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना

Leave a Reply