मुक्तक (जानेमन )

बो जानेमन जो मेरे है बो मेरे मन ओ ना जाने
अदाओं की तो उनके हम हो चुके है दीवाने
बो जानेमन जो मेरे है बह दिल में यूँ समा जा
इनायत मेरे रब करना न उनसे दूर हो पायें

मुक्तक प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

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