मुक्तक

रहमत जब खुदा की हो तो बंजर भी चमन होता
खुशिया रहती दामन में और जीवन में अमन होता
मर्जी बिन खुदा यारो तो जर्रा भी नहीं हिलता
खुदा जो रूठ जाये तो मय्यसर न कफ़न होता

मुक्तक प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

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