मुक्तक

आप को देखे हुए कई मास हो गया
पाया न हाल आपका दिल उदास हो गया
क़दमों ने साथ छोड़ा ,आँखें बंद हो चुकीं
अब हाथ भी बेजान ,सांसें मंद हो चुकीं

मुक्तक प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

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