पेड़

पेड़

 

पेड़ सिर्फ पेड़

नहीं होते वे होते है

घर के पते की तरह

 

उन दिनों

जब गाँव में

नहीं हुआ करते थे –

डाकघर -बिजली दफ्तर

तब पेड़ से ही पहुंचा जा सकता था

ठीक-ठीक ठीहे तक ।

 

यहाँ तक कि

बच्चे बता देते थे

मेरे घर का पता

नीम वाले पगरे  में

रहते हैं गंगाधर ।

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