हैरान

सोचकर हैरान है हम , क्या हमें अब हो गया है
चैन अब दिल को नहीं है ,नींद भी आती नहीं है

बादियों में भी गए हम ,शायद आ जाये सुकून
याद उनकी अब हमारे दिल से भी जाती नहीं है

हाल क्या है आज अपना ,कुछ खबर हमको नहीं है
देखकर मेरी बिबशता तरस क्यों खाती नहीं है

हाल क्या है आज उनका ,याद उनको है हमारी
किस तरह कैसे कहे .मिलती हमें पाती नहीं है

किस तरह कहदे मदन जो बात उनतक पहुच जाये
बात अपने दिल की भी तो ,अब लिखी जाती नहीं है

मदन मोहन सक्सेना

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