दिया

दिया जो टिमटिमाता है
दिया जो अंधेरे मे प्रकाश दिखाता है
दिया जो देने का भाव है
उसे पाकर मैंने सब कुछ पा लिया
प्रज्ञा की अनिल जब चली
तो दिया टिमटिमा दिया
दिया मेरी बेटी
जिसकी मुस्कुराहट मुझे
जिंदगी जीना सिखाती है
फूल सी सुंदर
बहुत समझदार
प्यारी मेरी दिया