ली ममता की जान

बेटा  ने  माँ  को  रुलाया  है ,
हर   किया  उसका   उपकार  भुलाया  है ,
खुदा  से  शायद  उसे  डर  नहीं ,
इसलिए  माँ  के  ममता  का  मज़ाक  उड़ाया  है .

जिस  माँ  ने  दिल  से  लगा  कर  रखा  उस  बेटे  को  हर  पल ,
हाथ  थाम  उसे  इस   ज़मीन  पे  चलना  सिखाया ,
कब  खड़ा  होगा  मेरा   बेटा अपने  पैरो  पे ,
सोचती  रहती  कब  आएगा  वो  पल .

दुनिया  से  दूर  उसे  अपने  कोख  में  छुपा  कर  रखती ,
किसी  की  नज़र  ना लगे  ये  सोच  उसके  आस -पास  हीं रहती ,
ओझल  हो  जाता  पल  भर  के  लिए  तो  वो  घबरा  जाती ,
देख  उसे  फिर  अपने  सीने  से  लगा  चैन  से  लोरी  सुना  उसे  सुलाती .

भूखी  रहती  वो  खुद  और  दुःख  सहती ,
अपने  लाल  को  अपने  आँखों  का  तारा  कहती ,
कस्टो का  साया  उस  पर  ना पड़ने  देती ,
अकेले  में  अपने  गरीबी  पे  रोटी  और  हर  वक़्त  उसकी  चिंता  करती .

दुआ  करती  भगवन  से  हटा  दे  ये  दुःख  का  साया ,
तेरी  बदौलत  हीं  मैंने  ये  बेटा  है  पाया  ,
इस   जहां  का  हर  सुख  देना  चाहती  मैं  उसे ,
मेरा  मासूम ,मेरा  जिगर  का  टुकरा  कहती  मैं  जिसे .

दिल  को  रहत  मिला  जब  वो  बेटा  जवान  हुआ ,
सोची  अब  हर  दुःख ,सुख  में   बदल  जाएगा ,
बेटा  मेरा  मेरे  लिए  इस  दुनिया  का  हर  ख़ुशी  लाएगा ,
जब  भी  कोई  आंच  मेरे  ऊपर  आये  तो   मुझसे  पहले  ये  खुद  आएगा .

पर  क्या  मिला  उस  माँ  को ,इज्जत  तो   छोड़  बेटा  उससे  गाली  देता ,
माँ  को  भूखा  छोड़  “खुद  अपनी  चिंता  कर ” ,कह ,खुद  पहले  खा  लेता ,
कुछ  काम  ना  करता  दिन  भर  घर  में  पड़ा  रहता ,
“बुढ़िया  क्यूँ  ना  तू  दुसरो  के  घर  बर्तन  मांजती “, ये  कहता .

पड़  गया  वो  एक  लड़की  के  प्रेम -जाल  में ,
अब  उसके  सिबा  उसे  कुछ  ना  दीखता  इस  दुनिया  में ,
माँ  ने  उसे  कितना  समझाया  बेटा  ये  ठीक  नहीं ,
बेटा  कहता  लड़की  वो  अरबो -पति  है  मांगना  मुझे  तेरे  जैसा  भीख  नहीं .

लड़की  ने  उस  से  कहा  बनूँगी  तेरी  जब  मानेगा  मेरा  एक  बात ,
कहा  उसने  करूँगा  हर  कुछ  पाने  को  मैं  तेरा  साथ ,
बोली  वो  लड़की  “लाकर  दे  मुझे  अपने  माँ  का  दिल “,
वो  आवारा  कहा  ये  काम  तो  बड़ा  आसान  कुछ  नहीं  इसमें  मुस्किल .

गया  पास  माँ  के  चाकू  छिपाए  वो  बेरहम  बेटा ,
माँ  को  धोखा  में  रख  जाकर  उसके  गोद   में  लेटा ,
बड़े  प्यार  से  माँ  ने  अपने  लाल  का  सिर  चूमा ,
तभी  उस  निर्दयी  बेटे  ने   चाकू  मार  माँ  की  तरफ  घूमा .

मरते  वक़्त  भी  माँ  ने  अपने  बेटे  को  आशीर्वाद  दिया ,
तुम्हारी  वो  इक्च्छा पूरी  हो  जाए  जिस  कारन  तुमने  मेरा  जान  लिया ,
हमेशा  खुश  रह  ज़िन्दगी  में  यही  दुआ  है  मेरी ,
हस्ते  रहे  तू   और  सफल  हो  ये  जीवन  तेरी .

उस  बेटा  को  तनिक  भी  दुःख  ना  हुआ ,
अब  वो  लड़की  मेरी  हो  जायेगी  सोच  ये  खुश  हुआ ,
सीने  से  निकाल  अपने  माँ  का  दिल  वो  चला ,
मरते  उस  दिल  से  यही  शब्द   निकले -“भला  हो  तेरा “.

बड़ा  खुश  हो  पहुंचा  लेकर  दिल  उस  लड़की  के  पास ,
देख  उसके  माँ  का  दिल  उसके  हथेली  पे  रुक  गयी  पल  भर  के  लिए  उसकी  सांस ,
बोली  ये  क्या  कर  डाला  ओ  पापी  तूने ,
अपने  माँ  को  मार  उसका  दिल  लाया  मुझे  दिखाने .

रोती  हुई  कही  वो  लड़की  तूने  ये  क्या  कर  डाला ,
मैंने  तो   तुम्हे  यूँ  हीं  कहा   था  छुड़ाने   को  अपना  पाला ,
देवी  जैसे  माँ  को  तुमने  कैसे  मार  दिया ?
जिसने  हर  दर्द ,दुःख  सह  तुम्हे  इतना  बड़ा  किया .

वो  बेचारा  अब  सोचा  की  ये  मुझ  से  क्या  हुआ ,
माँ  का  दिल  उसने  तब  बड़े  प्यार  से  छुआ ,
मरे  उस  दिल  से  आवाज़  आई  “मेरे  मरने  पे  हीं  तुम्हे  मुझ  पे  प्यार  आना  था” ,
तब  तोह  बहुत  दिन  पहले  हीं  मुझे  इस  दुनिया  से  चले  जाना  था ……

 

 

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