इन अश्कों की हम पे कुछ तो रहमत है

इन अश्कों की हम पे कुछ तो रहमत है

मेरे तकिये पे भी शायरी जिंदा है

 

In Ashko’n Ki Hum Pe Kuch To Rehmat Hai
Mere Takiye Pe………Bhi Shaairi Zinda Hai

ان اشکوں کی ہم پے کچھ تو رحمت ہے
میرے تکیے پے بھی شاعری زندا ہے

 

– संजीव आर्या

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