तक्षकों के दंस

 

आज पग -पग पर

खडा है

कंस /

नखों में  भर

तक्षकों के

दंस /

त्रस्त जीवन

गरलमय

परिवेश ,

चतुर्दिक

संत्रास का

उन्मेष !

रच रहा

इतिहास भी अब

ध्वंस /

आज पग -पग पर खडा है कंस //

भरा वातावरण में

भय है ,

कहीं भी दिखता नही

नय है !

कष्ट में  हैं

पाण्डवों के वंश /

आज पग -पग पर

खडा है कंस //

शब्द खोते जा रहे

निज अर्थ ,

सिद्ध होते व्याकरण

अब व्यर्थ !

हो रहा अब तत्समों का भ्रंस /

आज पग -पग पर खडा कंस //

 

3 Comments

  1. sangeeta swarup 27/10/2012
  2. reena maurya 27/10/2012
  3. anju(anu) 27/10/2012

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