कश्मकश

ये किस कश्मकश मे रखा है मुझे ऐ ज़िन्दगी कि लगता है ऐसे कि जैसे –

समन्दर कि उस गह्राराई मे खडा हूं जहां से निकल जाना भी बेमानी होगी और डूब जाना भी ।

– हितेन पाटीदार

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  1. abhiraj singh अभिराज 15/01/2013

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