भ्रम

काले बादल

आसमान में

कितनी ऊँचाई पर

आभासित होतें हैं,किन्तु

आभास सच नही होता है

बादलों से बरसता पानी

 


हमें भिगोता है। समय चक्र चलता है

हम भी चलते हैं

सफर जिन्दगी का

पल-पल तय करतें हैं

नाते-रिश्ते अनवरत् निभाते हैं

वक्त की तर्ज पर

नाचते हैं, गातें हैं

आह्लादित होते हैं,

खुशियाँ मनाते हैं

दूर कहीं रातों में मौन हृदय रोता है।

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