बुलबुला

जिज्ञासु मानव सृष्टि के रहस्य सुलझाता रहा

सृष्टि से रहस्य की पर्ते निकलती रहीं मानव,

मानव जाति की उत्पत्ति के रहस्य खोजता रहा

इतिहास और लम्बा होता रहा

मानव-मानव को खत्म करता रहा

नये मानव की उत्पत्ति होती रही

उस शाम मैं विशाल के किनारे

बुलबुलों को बनते-फूटते देख रही थी

पीले गेंद की तरह लटकता हुआ

सूर्य का गोला झाड़ी के पीछे गिर चुका था।

Leave a Reply