नयन-तुम्हारे

तुम्हे  जो  देखा,

 मन कही खो गया।

भीग गया सारा समां,  

मौसम दीवाना हो गया।

होठ थे खामोश तुम्हारे,

आँखों में बिखरे अफसाने।

मूक निमंत्रण दे गये,

वाचाल-से नयन तुम्हारे।

रंग बिखरे हैं दिशाओं में,  

स्वप्न जगें हैं आशाओं में।

एक प्रकाश है घटाओं में,

तुम्हारी आहट है हवाओं में।

तुम्हे जो देखा,    

मन कहीं बस गया।

बदल गये दिन-रात सारे,    

सर्वत्र राग रच गया।

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