रावण

रावण
दशहरे पर जब हमने
जलते हुए रावण को देखा
मन से मिट गई
शंकाओं की रेखा कि
अब कोई रावण नही बचा है
राम ने रावण के शीश अलग करके
उसका अंत कर दिया है
पर ये क्या
अभी रावण पूरा नही जला था
एक मनचला
लड़की को छेड़ने मे लगा था
मंच के करीब गए
तो नेताजी भाषण दे रहे थे
भाषण खत्म किया और भारत माता की जय
बोल कर बैठ गए
पर उनकी निगाह बराबर
मंच संचालिका पर लगी थी
उन्होंने अपने पी.ए को इशारा किया
पी.ए ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया
रात के लिए बुक कर ली है हजूर
इन सब इशारों समझने में थोड़ी देर लगी
पर समझ आया तो दंग रह गए
क्या (रावण) नेता
कवि सम्मेलन का आयोजन था
दशहरे के उपलक्ष में
एक कवि महोदय कविता पढने आए बड़े ही जोश में
महोदय सीधे खड़े नही हो पा रहे थे
नशा बंदी पर कविता बोलने जा रहे थे
ये सब हमें रास नही आया
हमने अपना आगे बढ़ाया
देखा एक पुलिस वाला किसी आदमी से पैसे ले रहा था
आयोजन में बिना पास के ऐंटरी दे रहा था
ये सब देखकर मन फिर शंकाओं के जाल में उलझ गया
सोचने लगा कि
त्रेता युग में एक ही रावन था
जो सीता को हर ले गया था
तब राम भी एक थे और
रावन भी एक
ऐसे में मारना हुआ संभव
कलयुग में रावन की क्वालटी और क्वांटिटी ज्यादा है
राम का रेशो बहुत कम
ये तो परंपरा है जो निभा रहे हैं हम
हर दशहरे पर झूठ-मूठ का रावन जला रहे हैं हम

8 Comments

  1. yashoda agrawal 22/10/2012
  2. kavita rawat 24/10/2012
  3. Yashwant Mathur 24/10/2012
  4. indu singh 24/10/2012

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