देश को दो अब नया विकल्प

 

लिखो नई पटकथा देश की

रचो नया इतिहास !

गांव- गांव में नगर-नगर में

फैले नया उजास !!

ॠद्धि- सिद्धि -संॠद्धि देश से

है अब कोसों दूर ,

अमन-चैन को निगल गये हैं

मिलकर सारे क्रूर।

मिटे- भूख-भय-संशय मन से

मिट जाये संत्रास !

लिखो नई ……………. !!

मंहगाई  राक्षसी फाड मुह

रही यहां विकराल ,

उधर धुरन्धर महारथी सब

बजा रहे हैं गाल ।

सोने की चीडी को सब मिल

बना रहे निज ग्रास !

लिखो नई …………….!!

घमासान है मचा चदुर्दिक

केवल-लूट-खसोट ,

भूखे जन  बिलबिला  रहे हैं

वे खायें अखरोट ।

असली मालिक जनता देखो

बन बैठी है दास !

लिखो नई …………!!

बढो केजरीवाल देश को

दो अब नया विकल्प ,

नहीं और अब मिटने  देंगे

लेना है संकल्प  ।

उठो-  उठो बांटो जन- मन में

नव- जीवन उल्लस !

लिखो नई पट- कथा……..!!

घर-घर में बेवशी और बस फैली है लाचारी

मस्ती काट रहे नेता-गण- बडे- बडे व्यापारी

जो जितने उंचे बैठे हैं

उतनी उंची प्यास !

लिखो नई ……..!!

– विजय गुंजन

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