दिल में सौ दर्द पाले बहन-बेटियाँ

कोई  कैसे  संभाले  बहन-बेटियां

दिल में सौ दर्द पाले बहन-बेटियां

घर  में  बांटें उजाले बहन-बेटियां

कामना  एक मन में सहेजे हुए

जा रही हैं शिवाले बहन-बेटियां

ऐसी बातें कि पूरे सफर चुप रहीं

शर्म की शाल डाले बहन-बेटियां

हो रहीं शादियों के बहाने बहुत

भेड़ियों के हवाले बहन-बेटियां

गांव-घर की निगाहों के दो रूप हैं

कोई कैसे संभाले बहन-बेटियाँ

5 Comments

  1. amita kaundal 20/12/2012
  2. Yashwant Mathur 26/12/2012
  3. Nihar Ranjan 26/12/2012
  4. Suman Kapoor 27/12/2012
  5. sangeeta swarup 27/12/2012

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