मौत

सब कुछ छुपा लेते हो सुन के हलकी सी आहट,
साफ दिखती मौत आने से पहले की घबराहट,
शाम को जाते हो सोने खोल दरवाजे के पट
रात बीत जाती है बदलते हुए करवट ।
जतन किये जा रहे हो जिनके मोह में,
चार दिन ही रोयेंगे वह तेरी विछोह में ,
चार कंधे ही ले जायेंगे दो हरे बासों पर,
कब्र थोड़ी ही है इतिहास की घासों पर।

2 Comments

  1. Yashoda Agrawal 14/10/2012

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