प्रेयसी

प्रेयसी

किताबो में मिलते थे जब प्रेम पत्र,
सामान जब मेरा रहता था अस्त व्यस्त,
नीद रातो को नयनो में आती न थी,
हसीं ख़ाब दिलो पर देती दस्तक,
जिसके आने का पता चल न सका,
नाम उसका ही जवानी है ।
हर जवानी की शायद यही कहानी है ।

गाल पिचके , निवाले नहीं उठते ,
बड़ी मुशिकिल से खड़ा अपने पैरों पर,
भरोसे ने खड़ा किया बुढ़ापे की दहलीज पर,
एतबार अब नहीं अपने या गैरों पर,
इस उम्र में भी आती है याद जिसकी,
वह मेरी प्रेयसी पुरानी है ।
हर जवानी की शायद यही कहानी है ।

आशु

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