कर्ज…..मा-बाप का

कर्ज …..

 

एक होटल मालिक ने बैरे को डान्टा,

धर दिया चान्टा,

बोला मूर्ख ये क्या करता है?

जो आदमी बिल नही भरता,

तू उसकी प्लेट क्यू  भरता है?

एक कान से बहरा,

होटल का बैरा.

पहले तो मुस्कुराया,

फिर अपने मालिक को अवगत कराया

सर ये आपके पिता है

मालिक खीजा और चिल्लाया ,

ये पिता नही, मेरे अरमानो की अधजली चिता है,

सब जानते है मेरे पिता तो,

५ साल पहले ही मर गये थे.

और अपनी सारी वसीयत मेरे  नाम कर गये थे.

अपनी सच्चाई पहली बार किसी पर जता रहा हू

तू बहरा है इसलिये  बता रहा हू

उनके उठावने  की झूठी खबर,

हमने ही अखबार मे छपवायी थी.

चीलगढ से मगवाकर

एक लावारिश लाश की चिता जलाई थी

 अच्छा होता उस चिता पर इन्ही को लिटाया होता

कितना मुफ्त खाते है

कम से कम ये दिन तो न आया होता

अरे गाफिल! ये कल्युगी बेटे

अपने मा-बाप का कर्ज

कितनी जल्दी उतार देते है!

कुछ इनके तायनो से तन्ग आकर

आत्म हत्या कर लेते है

तो कुछ को ये जीते जी  मार देते है….

 

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