खून का चक्कर

भाई भाई प्रेम में बहुत बड़ा है मोह।

बहुएं आकरके सुनो करवाती हैं द्रोह।।

करवाती हैं द्रोह, मोह को तुड़वाती है,

घर, धन, दौलत, हार-खेत, बटवारा करवाती है।

कहें सुकवि देवेष यहां है खून का चक्कर।

इतर खून आकरके करवा देता टक्कर।।

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