कभी खुद को आज़माके देखेंगे….

इशारों से तुझको बुलाके देखेंगे ,
कभी खुद को आज़माके देखेंगे ,

पहुँचती है ये चिंगारी कहाँ तक ,
कभी दिल अपना जलाके देखेंगे ,

बिगाड़ेगा कैसे मौज -ए- समंदर ,
कभी रेत पे घर बनाके देखेंगे ,

कैसा लगता है अँधेरे में रहना ,
जलते चरागों को बुझाके देखेंगे ,

सामने हो चाँद ख्वाहिश है मेरी ,
तेरे चेहरे से जुल्फ हटाके देखेंगे !!

6 Comments

  1. Manjeet 11/10/2012
  2. Director MHA 20/10/2012
  3. nadir 20/10/2012

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