चतुर मदारी

घूम -घूमकर चतुर मदारी
दिखा रहा  चहूओर तमाशा !

नाला -नलिया सडक- सडकिया

कही-कही पर पुल औ पुलिया

गढढे मे चल रही सबारी

पब्लिक झासा ही झासा !

मेलों में पुस्तकें सजीं हैं

उर्दू में प्रार्थना बजी है

मनन-चयन की है लाचारी

राज्यगीत है वारहमासा !

घूम- घूमकर ………..!!

काम करो कुछ ऐसे- वैसे

यहां-वहां बस फेको पैसे

सभी जगह हिस्सेदारी

खुला हाथ बंट रहा वताशा !

घूम- घूमकर …………..!!

गांव- गांव में नगर-नगर में

भाषणबाजी ड्गर -ड्गर में

सही विकास की दौडी गाडी

चला नकलची ओढे भाषा!

घूम-घूमकर ……….!!

राजा का सम्मान बढा है

जन-गण -मन पर नशा चढा है

सारी दुनिया है मुठठी में

मनमाना इतिहास गढा है

जोडे हाथ खडे नर-नारी

धूम मचाए ढोलक- ताशा !

घूम – घूमकर ……….!!

रचयिता— आचार्य विजय गुंजन

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