प्रारंभ ही विजय का जब सूत्रधार है

प्रारंभ ही विजय का जब सूत्रधार है
चंद्र की कला अपरंपार है
अरूणिय लालिमा
वातावरण को सुंदर बनाती है
शशी की शीतलता मन को ठंडक
पहुँचाती है यही प्रतिभा तो श्रेष्ठ बनाती है
अनिल का काम तो है बहना
इसलिए सब तरफ आलोक है ना

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