सदी के नायक

याद कर रहा आज पुनि, बापू तुमको देश।

दीन दलित के लिए ही, धरा फकीरी वेश।।

धरा फकीरी वेश, जलाये वश्त्र विदेशी।

जन मन में भर दिया, आपने मन्त्र स्वदेशी।।

सत्य कहत सुन आज पुनि, जगा विदेशी वाद।

भारत छोडो का वही, नारा कर मन याद।।

भाव भेद मन से मिटा, सब हैं एक समान।

ऊँच नीच कोई नहीं, सबका इक भगवान।।

सबका इक भगवान, आपने हमें सिखाया।

मजहब सभी समान, अहिंसा पाठ पढ़ाया।।

पर सत्ता के ओट आज, पनप रहा अलगाव।

बापू तेरे देश में, बचा नहीं सम भाव।।

दुबले पतले आप पर, कद के बड़े महान।

बापू सरपट चाल तव, सारा चकित जहान।।

सारा चकित जहान, देश आजाद कराया।

सत्य अहिंसा जगत, आपने अलख जगाया।।

कहें सत्य कविराय तुम, जग मानव पहले।

लोहा माने जगत वह, बापू नहीं दुबले ।।

                     -सत्यनारायण सिंह

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