प्रेम और प्रबंध विवाह

प्रेम विवाह मे आप एक दूसरे कोकाफ़ी अरसे से जानते हैं,
मेरी होने वाली संगिनी देवी का काली रूप हैयह भली भाँति मानते हैं|

 

साल दो साल का भरपूर प्रेमफिर आप आज्ञाकारी बन जाते हैं,
अपनी होनेवाली के समस्त तांडवों के आगे आत्मसमर्पण कर जाते हैं|

 

फिर विवाह मात्र एक रस्म हैजो रिश्तेदारों के सामने मनती है,
एक दूसरे के सारे टोने टटके समझजिंदगी बड़े इत्मिनान से चलती है|

 

यह दुनिया भी अजीब है इसेअच्छी अंडरस्टॅंडिंग का नाम देती है,
यह जान लो स्व आमंत्रित प्रकोप के अंडर शांतिपूर्वक स्टॅंडिंग ही काम देती है|

 

प्रबंध विवाह इससे अलग हैलोग इसके रीति रिवाज अलग बतातें हैं,
समझ तो नही आतापर आजकल होनेवाले इसमे कॉर्टशिप पीरियड बिताते हैं|

 

कुछ अज्ञान उत्साहित हो सोचते हैंइस वक़्त मे एक दूसरे को समझ लेना है,
अरे समझो प्रेम विवाह के ४

साल के सिलबस कोदो महीने मे निपटा कर इक्जाम देना है|

 

देर से सही आँखें खुल जाती हैंप्रेम विवाह मे हमला आप सामने से पाते है,
देखा जाता है इसमे सारे ब्रह्मास्त्रज़्यादातर दूर संचार के माध्यम से आते हैं|

 

सोंचो की जो सामने नही हैफिर खून का घूँट पी कर मूक रह जाते हो,
साल दो साल सब रमणीय लगता हैपर उसके बाद आत्मसमर्पण कर जाते हो|

 

सब बातों का सार यही हैनाग लपेटे कैलाषी जब चरणो मे पड़ गये,
अपना जीवन ख़त्म समझना जब सर्व शक्तिमान के आगे तुम अकड़ गये|

निकुम्भ

3 Comments

  1. Yashwant Mathur 03/10/2012
  2. Sri Prakash Dimri 03/10/2012
  3. bhavana 04/10/2012

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