दुनिया में एक शख्स

माना की दिल से प्यार तेरा कम नहीं होता
दुनिया में मगर एक यही गम नहीं होता
 
दुनिया में एक शख्स ही तुमको है क्यों अज़ीज़
माँ-बाप का भी प्यार कुछ कम नहीं होता
 
निकलोगे खुद से बाहर तो दुनिया है खुशगवार
पानी कभी कुएं का आबेजमजम नहीं होता
 
 
खुद ही निकलना है तुम्हें यादों के भँवर से
हिम्मत के सिवा इसका कोई मरहम नहीं होता
 
करना तो चाहता हूँ बहुत कुछ अपने भी लिए
बढ़कर खुशी से सबकी खुद का आलम नहीं होता
 
करते हैं तेरे जज़्बे को सलाम हम भी नादिर
कभी प्यार जिम्मेदारियों से अहम नहीं होता
 
                                                                    (आबे-जमजम – मक्के का पवित्र पानी)

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  1. nimoy 27/09/2012

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